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बिना कहे हर बात का एहसास करा देती हो।
शब्द तो बहुत है कहने के लिये . . .
पर कुछ बातें कभी पूरी नहीं होती।
'आशुतोष ' जिसने कुछ कहा नही, आज कह रहा है . . .
हर बात शब्दों कि मोहताज़ नही होती।
शब्द पूरे नहीं पड़ते, दिल की बात बताने में . . .
ज़िन्दगी तमाम होती है, बात समझ कर समझाने में।
कौन सी वो बाते है जो कह कर भी अनकही लगतीं है . . .
यह वो छोटी छोटी बातें है जो कहने में बहुत बड़ी लगती हैं।
इतनी बड़ी बाते जिनको कहने मे उम्र कम लगती है . . .
दो पल ही काफी होते है, गर दिल से दिल मिले होते है।
. . . आशुतोष . . .

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