Saturday, July 06, 2019

दो बातें और कर चले...

कुछ यूं कर चले, दो बातें और कर चले
एक बात तुम कहो, एक बात हम कहे
चलो यूँ ही कर चले, दो बातें और कर चले

कुछ बाते पुरानी है, कुछ बाते और कर चले
कुछ नई बाते करे, कुछ अफ़साने बनाते चले

अफसाना बनता है, बातो ही बातो से
चलो यूँ ही कर चले, दो बातें और कर चले

कुछ यादें बातो की, कुछ बातों की यादें
चलो बातो की यादो के सफर पर चले

कुछ बाते पुरानी हैं, कुछ नयी कर चले
कुछ यूं कर चले, दो बातें और कर चले

कुछ करी है, कुछ बाते और कर चले
चलो यूँ ही सही, दो बातें और कर चले


...आशुतोष...

Friday, May 09, 2014

. . . ज़िन्दगी का फलसफ़ा. . .

ज़िन्दगी का फलसफ़ा भी अज़ीब है या अजीब घटनाओ का फलसफ़ा है ज़िन्दगी।

कभी हम आज को जीने की बात करते है . . . 
कभी हम कल को संवारने की . . . 
सारा वक़्त तो जो बीत गया उस पर ही व्यतीत करते है। 

ज़िन्दगी का फलसफ़ा भी अज़ीब है या अजीब घटनाओ का फलसफ़ा है ज़िन्दगी।

हम अपनी परेशानिओ मे घिरे रह्ते है  . . . 
कुछ कर गुजरने की कोशिशे मे लगे रहते है। 

सपने तो बहुत देखते है  . . . 
लेकिन सपनो मे ही खोये रहते है। 
सपने सच करने के कोइ कदम नही . . . 
बस सपने पूरे हो जाये ऐसे सपने देखते रहते है।

ज़िन्दगी का फलसफ़ा भी अज़ीब है या अजीब घटनाओ का फलसफ़ा है ज़िन्दगी।

 आशुतोष -

- - - कश्मकश - - -

हम तुम से कहना बहुत कुछ चाह्ते है पर कह नही पाते हैँ ... 
अपना हाल- ए -दिल बताना चाहते है पर बयाँ नही कर पाते है। 

ये वो क्या चीज़ है जो हमको रोक रही है… 

हम अपने प्यार का इज़हार क्यो नही कर पा रहे है। 

ज़िन्दगी इतनी आसान नही … जितना हम समझते थे… 

पर इतनी रूमानी होगी…  ये भी कहा पता था। 

हम बहुत हसीन पलों को खोते जा रहे है . . . 
तुमसे मिलने को तड़पते जा रहे है। 

कभी तो हम हिम्मत करेंगे … और अपने प्यार का इज़हार करेंगे । 

ज़माना लाख कोशिशे कर ले… हम तुम्हे अपना बना कर ही मानेंगे । 
अभी हम हिम्मत जुटा रहे है… फिर हम प्यार लुटाएंगे । 

हम तुम से कहना बहुत कुछ चाह्ते है पर कह नही पाते हैँ. . . 

अपना हाल- ए -दिल बताना चाहते है पर बयाँ नही कर पाते है। 

- आशुतोष  

Tuesday, May 06, 2014

प्यार की भाषा . . .



तुम मुझे कुछ कह, कुछ और हीं समझा देतीं हो . . .
बिना कहे हर बात का एहसास करा देती हो।

शब्द तो बहुत है कहने के लिये . . . 
पर कुछ बातें कभी पूरी नहीं होती।

'आशुतोष ' जिसने कुछ कहा नही, आज कह रहा है . . . 
हर बात शब्दों कि मोहताज़ नही होती।

शब्द पूरे नहीं पड़ते, दिल की बात बताने में . . . 
ज़िन्दगी तमाम होती है, बात समझ कर समझाने में।

कौन सी वो बाते है जो कह कर भी अनकही लगतीं है . . . 
यह वो छोटी छोटी बातें है जो कहने में बहुत बड़ी लगती हैं।

इतनी बड़ी बाते जिनको कहने मे उम्र कम लगती है  . . . 
दो पल ही काफी होते है, गर दिल से दिल मिले होते है। 

. . . आशुतोष . . .